Published on: 06 Jun 2026
*आईजीयू में विश्व पर्यावरण दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन।*
इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय, मीरपुर के पर्यावरण प्रकोष्ठ और पर्यावरण विज्ञान विभाग द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर “प्रकृति से प्रेरित: जलवायु के लिए, हमारे भविष्य के लिए” विषय पर एक कार्यशाला-सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम विशेष रूप से विश्वविद्यालय के माली, ग्रामीण किसानों और स्थानीय निवासियों के लिए आयोजित किया गया। कार्यशाला का आयोजन पर्यावरण विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. सुमन नागपाल के नेतृत्व में किया गया एवं कुलसचिव प्रोफेसर दिलबाग सिंह की उपस्थिति में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में ओएसडी टू सीएम, हरियाणा श्री नरेंद्र जी उपस्थित रहे। कुलसचिव प्रोफेसर दिलबाग सिंह ने विशिष्ट अतिथि को पौधा देकर एवं शाल भेंट कर सम्मानित किया। श्री नरेंद्र जी ने हरियाणा में पर्यावरण संरक्षण विभागों की योजनाओं की जानकारी को विस्तार पूर्वक बताया। कुलसचिव प्रोफेसर दिलबाग सिंह ने विश्व पर्यावरण दिवस की शुभकामनाएं देते हुए सभी को पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेते हुए अधिक-से-अधिक पेड़ लगाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि पौधा लगाने के साथ-साथ उसकी देखभाल भी अवश्य करें और सभी एक जुट होकर पर्यावरण को सुरक्षित रखने में अपना सहयोग दें। कार्यक्रम में आर्ट ऑफ लिविंग की शिक्षिका और सरकारी कार्यक्रमों की क्षेत्र समन्वयक, रेवाड़ी की सुश्री सुमन यादव ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। उन्होंने ध्यान, तनाव प्रबंधन और मानसिक स्वास्थ्य पर एक संवादात्मक आर्ट ऑफ लिविंग सत्र का संचालन किया।
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण वरिष्ठ शोधार्थी देव और उनकी टीम द्वारा विकसित एक अभिनव शीतलन मॉडल का प्रदर्शन था। इस मॉडल में वाष्पीकरण शीतलन सिद्धांतों पर आधारित एक प्राकृतिक शीतलन प्रणाली बनाने के लिए मिट्टी के चाय के प्यालों (कुल्हड़ों) का उपयोग किया गया था। पर्यावरण के अनुकूल और कम लागत वाली यह नई तकनीक गर्मियों के दौरान घर के अंदर के तापमान को कम करने का एक प्रभावी समाधान प्रदान करती है, साथ ही अपशिष्ट पदार्थों के पुन: उपयोग को भी बढ़ावा देती है।
प्रतिभागियों को भीषण गर्मी के दौरान पौधों की सुरक्षा और उन्हें पुनर्जीवित करने के व्यावहारिक तरीकों का प्रशिक्षण भी दिया गया। किसानों और बागवानों ने व्यावहारिक सत्रों में सक्रिय रूप से भाग लिया और कार्यशाला के दौरान प्रदर्शित टिकाऊ तकनीकों की सराहना की।
कार्यक्रम का समापन पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार प्रथाओं को अपनाने और जलवायु परिवर्तन और सतत विकास में योगदान देने की प्रतिज्ञा के साथ हुआ। इस अवसर पर जैव एवं प्रौद्योगिकी विभागाध्यक्ष डॉ. रमेश कुमार, एसडीई श्री सुरेंद्र कुमार, कैप्टन मुकेश यादव, डॉ. जयपाल राजपूत, विक्रम सिंह, इंजीनियर सोनिया नाहर, अनिल कुमार, पीयूष सहित बागवानी माली साथी एवं ग्रामवासी उपस्थित रहे।